नई दिल्ली। देश के पूर्व अटार्नी जनरल सोली जे सोराबजी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए के गांगुली को महज आरोपों के आधार पर अपना इस्तीफा नहीं देना चाहिए।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट बार एसोसियेशन के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण एच पारेख ने आरोपों की जांच के लिए मुख्य न्यायाधीश की ओर से तीन न्यायाधीशों की समिति की गठन पर प्रश्नचिह्न लगाया और कहा कि शीर्ष अदालत केवल मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ जांच कर सकती है ना कि किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के।
जस्टिस गांगुली 12 फरवरी 2012 को सेवानिवृत्त हुए थे। वह उस समिति के सदस्य भी रहे जिसने टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में सभी 112 लाइसेंस रद्द कर दिए थे। उन्होंने स्वयं पर लगे सभी आरोपों को फर्जी करार देते हुए कहा है कि वह हालात के शिकार थे और आरोपों से आहत हैं।
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