कलईकुंडा। भारत के पहले सुपरसोनिक जेट मिग-21 एफएल बुधवार को कलईकुंडा हवाईअड्डे की हवाई पट्टी पर सुबह 9.45 बजे अंतिम बार उतरा और 50 सालों के लंबी सेवा के बाद भारतीय वायुसेना के इतिहास में तब्दील हो गया। 1963 में सेवा में शामिल किए जाने के बाद से लगभग हर चार लड़ाकू पायलटों में से एक पायलट इस विमान को उड़ा चुका है। इस विमान ने टरमक इलाके में आसमान में चार विमानों के समूह के साथ अंतिम उड़ान भरी।
तीन मिग-21-27 एमएल विमानों ने मिग-21 एफएल (टाइप-77) को सलामी दी। एयर चीफ मार्शल एन.ए.के ब्राउन ने, ऑपरेशनल कनवर्जन यूनिट (ओसीयू) के कमांडर कैप्टन वी.पी.सिंह की कमान में हुई परेड का निरीक्षण किया।
टेल नंबर सी-1125 वालेमिग-21 एफएल को 'एयुल्ड लेंग साइन' की धुन के साथ बाहर लाया गया और विंग वॉकर इसके साथ मार्च कर रहे थे। सबसे युवा ओसीयू पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट एल. नागराजन ने ब्राउन को मिग-21 एफएल लड़ाकू विमान के दस्तावेज सौंपे।
अपने उद्बोधन में ब्राउन ने इसे भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के इतिहास निर्णायक पल कहा। उन्होंने कहा कि आज का कार्यकम इंडियन एयरफोर्स के इतिहास का निर्णायक पल है, क्योंकि हम इस प्रतिष्ठित लड़ाकू विमान के जरिए लगभग पांच दशकों से चल रही उल्लेखनीय परिचालन सेवा के अंत पर पहुंच गए हैं। इस मौके पर ब्राउन ने कॉफी टेबल बुक और स्मारक डाक टिकट भी जारी किया।
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