Saturday, 11 October 2014

विकास के बाद भी अपने ही गढ़ में ...




डी पी सतीश


रोहतक(हरियाणा)। जैसे ही आप दिल्ली की सीमा को पार करते हैं और हरियाणा में प्रवेश करते हैं, आप हरियाणा के रोहतक, झज्जर और सोनीपत जिले में चहुमुखी विकास होते देखेंगे। एक खूबसूरत 6 लेन हाईवे 50 मिनट के भीतर आपको बहादुरगढ़ से रोहतक नगर की ओर ले जाएगी। रोहतक नगर, दिल्ली-हरियाणा सीमा पर बहुत तेजी से विकसित हो रहा नगर है। भले ही हरियाणा में इस बार कम बारिश हुई है। लेकिन, धान-गेहूं और गन्ने के हरे-भरे लहलहाते खेत ये बताते हैं कि यहां सिंचाई की अच्छी सुविधा है।


रोहतक नगर स्वच्छ, अच्छी तरह से संगठित और नव निर्मित शिक्षण संस्थानों,अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और हाउसिंग कॉलोनियों से अटा दिखता है। सभी सड़कें प्लेन हैं और शायद ही कोई गड्ढा हो। ट्रैफिक व्यवस्थित है और हर तरफ समृद्धि के संकेत मिलते हैं। रोहतक हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गृहनगर है। यहां तक कि उनके घुर विरोधी मानते हैं कि पिछले 10 साल में हुड्डा ने रोहतक, झज्जर और सोनीपत के लिए बहुत काम किये हैं। जो कोई भी इन क्षेत्रों का दौरा करता है वो हुड्डा के विकास के दावे को सही बताते हैं। लेकिन, इस बार वो इतने विकास करने के बाद भी अपने ही गढ़ में एक कठिन परिस्थिति में हैं।


पिछली बार हुड्डा के बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रतिनिधित्व में कांग्रेस ने रोहतक लोकसभा सीट के 9 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार, कांग्रेस इन 9 विधानसभा सीटों में कम से कम पांच सीटों पर कड़ी टक्कर का सामना कर रही है।


रोहतक नगर के आसपास चार विधानसभा सीट रोहतक सिटी, कलानौर, मेहम और गरही सम्पला-किलोई हैं। हुड्डा गरही सम्पला-किलोई के वर्तमान एमएलए हैं। यह विधानसभा क्षेत्र रोहतक शहर के सरहद पर है और यहां 50 फीसदी जाट वोटर हैं। हुड्डा इस बार भी जीत के लिए आश्वस्त हैं। लेकिन, स्थानीय लोगों का इस बार कहना है कि हुड्डा इस बार भारी बहुमत से नहीं जीत सकते हैं। वो कहते हैं कि हुड्डा त्रिकोणीय मुकाबले का सामना कर रहे हैं। उनको इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के चौटाला और बीजेपी से टक्कर मिल रही है।


आईबीएन लाइव से बात करते हुए, हुक्का गुड़गुड़ाते स्थानीय जाट ग्रामीण रामलाल ने बताया कि हुड्डा ने बहुत कुछ किया है। दस साल पहले ऐसा नहीं था। अगर आप सिर्फ विकास की बात करेंगे तो वो हमलोगों के लिए हुआ है। उनको आसानी से 9 सीट जीतनी चाहिए। लेकिन, इस बार वो बात नहीं है। इस बार विकास की तुलना में जाति एक अहम भूमिका निभा रही है और जो उनके पक्ष में नहीं है।


हुड्डा के चुनावसभा क्षेत्र में एक वोटर ज्योति मलिक ने हुड्डा के विकास पर विरोध में तर्क देते हुए कहा कि रोहतक एक पुराना जिला है। झज्जर और सोनीपत इस जिले से अलग हुआ है। ये पिछड़ा जिला नहीं रहा है। हुड्डा ने इसमें कुछ बेहतर सुविधाएं जोड़ दी हैं। अकेले अच्छी सड़कों का निर्माण, उनकी उपलब्धियों या प्रदर्शन को जज करने का एकमात्र मापदंड नहीं हो सकता। उन्होंने केबल अपने लोगों की मदद की है।


स्थानीय पत्रकार दीपक भारद्वाज बताते हैं कि हरियाणा में 25 फीसदी जाट मतदाता हैं। जाट होने की वजह से हुड्डा ने जाटों के लिए बहुत कुछ किये हैं, लेकिन दूसरे नाराज हैं। परंपरागत रूप से जाट एंटी कांग्रेसी हैं और हमेशा चरण सिंह, देवी लाल के लिए वोट करते रहे हैं और अब चौटाला के लिए। हालांकि हुड्डा ने अपने जात के लिए बहुत कुछ किया है, फिर भी उनमें से ज्यादातर आईएनएलडी के चौटाला का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस के कोर वोटर ब्राह्मण, बनिया, ओबीसी, दलित और पंजाबी हैं। वो जाट वर्चस्व नहीं पसंद करते हैं और हमेशा आईएनएलडी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस को वोट करते हैं। हुड्डा के जाट तुष्टीकरण ने इन जातियों को परेशान कर रखा है और इस बार इनके बीजेपी के साथ जाने की संभावना है। वो आरोप लगाते हैं कि हुड्डा ने अपने ही लोगों को सरकारी नौकरी दी है और कुछ मामलों में एक ही परिवार के चार लोगों को भी सरकारी नौकरी मिली है और कुछ मामलों में परिवार के किसी भी सदस्य को नौकरी नहीं मिली है।


रोहतक शहर से एक और मतदाता कौशिक कहते हैं कि लोग हुड्डा कबीले के दस साल के शासन से थक गए हैं और वो एक सख्त बदलाव की ओर देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोगों के लिए ये मायने नहीं रखता है कि हुड्डा ने रोहतक क्षेत्र के लिए बहुत कुछ किया है और इसका बढ़िया से विकास किया है।वो सिर्फ बदलाव चाहते हैं। इस समय बीजेपी इस अजीब स्थिति से लाभ लेने की कोशिश कर रही है।


आईबीएनलाइव से खूबसूरत लालही क्रिकेट स्टेडियम के बाहर, जहां सचिन तेंदुलकर ने अपना आखिरी रनजी मैच खेला था, स्थानीय निवासी शिवानी ग्रेवाल ने बताया कि चौटाला के जेल जाने ने आईएनएलडी के लिए सहानुभूति पैदा कर दी है। लोग इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताते हैं। वर्तमान में केंद्र की बीजेपी सरकार भी चुनाव से पहले चौटाला को परेशान करने के लिए सीबीआई का गलत इस्तेमाल कर रही है। अगर स्पष्ट विजय नहीं मिली तो भी ये चीजें आईएनएलडी को सिंग्ल पार्टी बनकर उभरने में मदद कर सकती है।


रोहतक और आसपास के चार सीटों में से कांग्रेस को हुड्डा द्वारा पिछली बार जीती गई सीट गरही सम्पला-किलोली जीतने की उम्मीद है। बाकी तीन सीटें रोहतक सिटी, कलानौर और मेहम में कांग्रेस के वर्तमान विधायकों को आईएनएलडी और बीजेपी से कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है।


रोहतक से महज 20 किलोमीटर दूर कलनौर दलितों के लिए रिजर्व सीट है। बीजेपी एक बार इस सीट को जीत चुकी है। जब आईबीएनलाइव इस चुनाव क्षेत्र में पहुंचा तो मथुरा से बीजेपी के सांसद और हिंदी सिनेमा की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमामालिनी एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहीं थीं। अगर ये जनसभा आनेवाले मतदान में परिवर्तन का संकेत है तो बीजेपी सूबे में बहुत अच्छा कर रही है।


स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता दावा करते हैं कि दलित, कांग्रेस से नाखुश हैं, फिर भी इस बार उसे एक और मौका देना चाहते हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री शुक्रवार को रोहतक में थे। उन्होंने कहा कि बीजेपी दलितों के हितों की रक्षा करेगी और वो इस बार पार्टी को समर्थन करेंगे। हालांकि, आईएनएलडी के पक्ष में क्या काम कर सकता है ये आईएनएलडी विरोधी कांग्रेस-बीजेपी वोट के संभावित बंटवारे पर निर्भर करता है।


10 साल तक हरियाणा में शासन करने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को वर्तमान चुनाव अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सबसे कठिन महसूस कर रहे हैं। वह अपनी जागीर बनाए रखने में सफल होते हैं, भले ही वो राज्य खो देते हैं, वो तब भी साथ में गिने जानेवाले शक्ति के रूप में रह सकते हैं। अगर वो असफल होते हैं तो ये रोहतक क्षेत्र में हुड्डा 'साम्राज्य' के अंत की शुरुआत हो सकती है।



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