Tuesday, 7 October 2014

अजब! चंद्रग्रहण पर सूर्य जैसा ...




नई दिल्ली। 8 अक्टूबर को चंद्रग्रहण के मौके पर इस बार आकाश में अद्भुत नजारा दिखेगा जब अपनी धवल चांदनी के लिए पहचाना जाने वाला चंद्रमा पूरी तरह से रक्तिम आभा लिए सूरज की तरह दिखाई देगा। खगोल वैज्ञानिकों के साथ ही यह आम लोगों के लिए भी एक बेहद दिलचस्प घटना होगी। अगले 20 साल तक दोबारा आपको यह दुर्लभ नजारा देखने का मौका नहीं मिलेगा।


अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा समेत दुनिया के कई खगोल वैज्ञानिकों ने इस मौके पर चंद्रमा को नए सिरे से जानने और समझने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। बुधवार को पूर्ण चंद्रग्रहण है। इस दौरान चंद्रमा अपने परिक्रमा पथ पर घूमते हुए मंगलवार की रात और बुधवार के तड़के सूर्य और पृथ्वी की सीध में आ जाएगा। मतलब पहले सूर्य होगा उसके बाद हमारी पृथ्वी और उसके बाद चंद्रमा।


ऐसी स्थिति में चंद्रमा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह ढक जाएगा। यह ऐसी स्थिति होगी जब सूर्य की किरणें पृथ्वी के गोलाकार बाहरी हिस्से के चारों ओर उसके धूलकणों से आच्छादित वायुमंडल से छिटकते हुए आवर्तित होकर चंद्रमा पर ऐसे पड़ेंगी कि वह रक्तिम आभा लिए एक सूरज की तरह दिखाई देगा। हालांकि इस दौरान चंद्रमा की रक्तिम आभा एक जैसी नहीं होगी बल्कि वह पृथ्वी के वायुमंडल में उस समय मौजूद धूलकणों की मात्रा के अनुरूप गहरी और हल्की होती रहेगी।


चंद्रमा के इस रूप को खगोल वैज्ञानिकों ने ब्लड मून का नाम दिया है। इस साल पूर्ण चंद्रगहण की यह घटना दोबारा हो रही है। इसके पहले पूर्ण चंद्रग्रहण 15 अप्रैल को देखा गया था। इस बार इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देखने का सबसे बेहतरीन अवसर उत्तरी अमेरिका के लोगों को मिलेगा। यह ऐसा ही होगा जैसा किसी सिनेमा हाल में सिनेमा देखने के लिए आप बॉलकनी की सीट पर बैठे हुए हैं। इसके अलावा हवाई द्वीप, ऑस्ट्रेलिया और जापान समेत प्रशांत महासागर के ज्यादातर हिस्सों में भी पूर्ण चंद्रग्रहण का नजारा दिखेगा। अफ्रीका, यूरोप और पश्चिम एशिया के क्षेत्र इस समय पृथ्वी के दूसरे छोर में होंगे लिहाजा वह इसे देखने से वंचित रह जाएंगे।


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