नई दिल्ली। कथित लव जेहाद के मुद्दे पर बयानों का बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में या कहें कि एकदम अलहदा बयान देकर मौलाना डॉक्टर कल्बे सादिक ने सारी सीमाएं लांघ दी हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष कल्बे सादिक ने तो लव जेहाद के जुर्म में सजा-ए-मौत मुकर्रर कर दी है। क्या कथित लव जेहाद के नाम पर धोखा देने वाले लड़कों को मार डालना चाहिए? क्या मौत का फरमान सुनाना देश, संविधान, इंसानियत और लोकतंत्र को दरकिनार करने वाला तालिबानी फरमान नहीं? यही है हमारा आज का मुद्दा।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भले ही कहें कि उन्हें लव जेहाद का मतलब नहीं पता, लेकिन उनकी पार्टी के नेता और देश के कई धर्मगुरुओं, कट्टरपंथियों और नफरत का जहर बोने वाले इस मुद्दे पर जहरीली बयानबाजी से नहीं चूक रहे। इसी कड़ी में एक अहम बयान आया भगवाधारी नेता और बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ का। उन्होंने कहा, तुम एक लड़की को धोखा दोगे, हम सौ को देंगे। फिर इंदौर से बीजेपी विधायक ऊषा ठाकुर बोलीं, गरबा में मुस्लिम लड़कों नहीं आने दिया जाए। इसके बाद शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे सादिक ने जब मुंह खोला तो सारे बयान पानी मांगने लगे।
गुरुवार को बनारस में डॉक्टर सादिक के इस बयान के बाद उनके प्रगतिशील होने के दावों की मानो धज्जियां उड़ गईं। जो भी मुसलमान लव जेहाद करे उसे मार देना चाहिए। इस बयान को हजम करना ज्यादातर लोगों के लिए कठिन था। सो, इस बयान की निंदा शुरू हो गई।
विवादित बयान से पहले तक कल्बे सादिक की गिनती प्रगतिशील मौलानाओं में होती थी। यहां तक कि कई बार उन्होंने नरेंद्र मोदी के मुद्दे पर भी अपने नरम नजरिये को छुपाया नहीं। एक बार तो उन्होंने अंग्रेजी कलेंडर देखकर ईद मनाने की वकालत कर मुस्लिम समुदाय में हलचल मचा दी थी। वो इस बात के हिमायती थे कि चांद देखकर ईद मनाने का रिवाज खत्म होना चाहिए। उनके नजरिये से ये बयान मुसलमानों को प्रगतिशील बनाने, समाज की मुख्य धारा में शामिल होने और दुनिया के साथ बदलने की नसीहत थी। लेकिन कथित लव जेहाद पर उनकी राय से नया विवाद शुरू हो गया है।
इस बयान ने देश के बड़े तबके को हैरान कर दिया। कल्बे सादिक का यही बयान मार दो लव जेहादियों को आज है बहस का मुद्दा। लव जेहाद के मुद्दे पर शिया गुरू कल्बे सादिक के विवादित बयान पर चर्चा में गरीब नवाज फाउंडेशन के चेयरमैन अंसार राजा, लेखक और वरिष्ठ महिला पत्रकार शीबा असलम फहमी, शिया धर्मगुरू कल्बे जव्वाद, मुस्लिम धर्मगुरू मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली, जामिया मिलिया इस्लामिया में इस्लामिक स्टडीज विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट अख्तर-उल-वासे और वरिष्ठ पत्रकार राणा अयूब ने हिस्सा लिया।
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