Friday, 12 September 2014

जेएनयूः चुनाव छात्रसंघ के, मुद्दे ...




नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव अपने आप में एक खासियत लिए हुए होते हैं और शुक्रवार को जब वर्ष 2014 के छात्रसंघ चुनावों के लिए वोटिंग हुई तब भी इन चुनावों पर हॉस्टल, लाइब्रेसी जैसे कैंपस के मुद्दों के साथ-साथ देश-दुनिया के राजनीतिक हालात का भी काफी असर दिखाई दिया।


जेएनयू में पीएचडी कर रहे किंगशुक नाग ने बताया कि इस बार इलेक्शन एक बदलाव के लिए हुए हैं। जब चुनाव होते हैं तो सिर्फ कैंपस के ही मुद्दे नहीं रह जाते हैं, बल्कि जो राजनीतिक हालात होते हैं, उनका भी असर पड़ता है। देश के राजनीतिक हालात से छात्रसंघ चुनाव भी अछूता नहीं रह सकता है और राजनीतिक माहौल का इन चुनावों पर भी असर पड़ा है।


रिसर्च स्कॉलर कमल किशोर ने बताया कि हॉस्टल का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा है। बहुत सारे छात्रों को एक-एक साल तक हॉस्टल नहीं मिल पाता। ये बहुत बड़ी समस्या है। बुनियादी ढांचे का काम स्लो है। लाइब्रेरी पिछले दो साल से बन ही रही है। पिछले 4 साल में छात्र 6 हजार से बढ़कर 9 हजार हो गए हैं, लेकिन कोई नया हॉस्टल नहीं बना है।


एमफिल कर रहे छात्र इस्लाम के लिए एडमिशन के लिए इंटरव्यू में सुधार का मुद्दा सबसे अहम है। इसके अलावा इस्लाम भी हॉस्टल के मुद्दे को जरूरी मानते हैं। इस्लाम जेएनयू चुनाव की खासियत बताते हुए कहते हैं कि यहां इलेक्शन का माहौल बहुत अच्छा रहता है। यहां के चुनाव में किसी भी संगठन का उम्मीदवार अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करता। यहां विचारधारा की लड़ाई होती है।


छात्रा प्रज्ञा ने बताया कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज के चुनाव में भी एंटी इंकंबेसी हावी रहती है। मैं चाहती हूं कि जो भी जीत के आएं वो ईमानदारी से छात्रों से जुड़े सभी मुद्दों को एड्रेस करें।


दूसरे अपडेट पाने के लिए IBNKhabar.com के Facebook पेज से जुड़ें। आप हमारे Twitter पेज को भी फॉलो कर सकते हैं।


IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!


अब IBN7 देखिए अपने आईपैड पर भी। इसके लिए IBNLive का आईपैड एप्स डाउनलोड कीजिए। बिल्कुल मुफ्त!






Categories:

0 comments:

Post a Comment