नई दिल्ली। एम्स में भ्रष्टाचार के कई खुलासे करने वाले मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी को हटाने पर विवाद गहराता जा रहा है। अपने खिलाफ हुए इस व्यवहार का जिक्र करते हुए संजीव चतुर्वेदी ने पीएम को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि उन्हें एक बीजेपी नेता के कहने पर हटाया गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने पर उन्हें ये सजा दी गई है।
संजीव की नियुक्ति एम्स में सीवीओ के रूप में जून, 2012 से जून, 2016 तक के लिए की गई थी। खास बात यह है कि निश्चित अवधि से दो साल पहले ही संजीव को हटाने का आदेश खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने दिया है। डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि संजीव चतुर्वेदी इस पद के लिए योग्य नहीं थे क्योंकि उनकी नियुक्ति सीवीसी की अनुमति के बगैर हुई थी। जब ये मामला हमारे संज्ञान में आया तो हमने तुरंत एक्शन लेते हुए उन्हें हटाने का फैसला लिया।
सीवीओ चतुर्वेदी को हटाने के लिए कुछ सांसद लंबे समय से स्वास्थ्य मंत्रालय पर दबाव डाल रहे थे। सांसदों ने उनकी नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुए मंत्रालय को लिखित शिकायत भी दी थी। सांसदों का आरोप था कि संजीव की नियुक्ति नियम-कानूनों को ताक पर रखकर की गई है।
दरअसल संजीव पहले हरियाणा में तैनात थे और वो वहां भी अपनी ईमानदारी की वजह से नेताओं के निशाने पर रहे। इसके बाद उनकी तैनाती एम्स में की गई और यहां भी अपनी ईमानदारी की वजह से वे सुर्खियों में रहे।
संजीव की तैनाती पर मनमोहन सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि सीवीओ को निर्धारित समय से पहले नहीं हटाया जा सकता है। अगर किसी बड़े कारण के चलते सीवीओ को हटाने का प्रस्ताव लाया भी जाता है तो कैबिनेट सचिव खुद मामले में जांच करेंगे।
संजीव के वकील कुलदीप तिवारी ने कहा कि नियमों के मुताबिक संजीव का तबादला 2016 तक नहीं हो सकता था। भ्रष्ट अधिकारियों की लॉबी ने संजीव का तबादला करवाया है। सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को बचाना चाहती है। आईएफस अफसर संजीव चतुर्वेदी ने खुद भी स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, पीएमओ, प्रधान सचिव और सीबीआई को चिट्ठी लिखकर अपने हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं।
संजीव ने लिखा है कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री सार्वजनिक तौर पर कहते हैं कि न खाऊंगा, न खाने दूंगा। वो ईमानदारी और बेहतर कार्यक्षमता पर आधारित नए वर्क कल्चर की बात करते हैं। दूसरी तरफ उनकी नाक के नीचे नई दिल्ली में देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल इंस्टीट्यूट में कुछ भ्रष्ट तत्व अपना धंधा चलाते हैं। लेकिन बीते दो साल से अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद भ्रष्ट ताकतें अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाईं। वो ऐसा कर पाने में नाकाम रहीं।
कांग्रेस नेता शकील अहमद का कहना है कि ईमानदार अफसरों को बेवजह हटाने से उनका मनोबल कमजोर होता है। अगर किसी अच्छी छवि के अधिकारी को बिना कारण हटाया गया तो गलत है। वहीं बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी का कहना है कि ये एक रुटीन फैसला है और इसपर राजनीति नहीं होनी चाहिए। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चतुर्वेदी को हटाए जाने पर केंद्र सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि क्या इसी तरह मोदी सरकार देश से भष्टाचार को खत्म करने वाली है।
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