Tuesday, 19 August 2014

बदमाशों से छूटी लड़की से पूलिस ...




नई दिल्ली। कानून में साफतौर पर कहा गया है कि महिला छेड़छाड़ की घटना की शिकायत किसी भी पुलिस थाने में दर्ज करा सकती है। मगर सच्चाई इससे उलट है। वारदात मुंबई के बांद्रा की है। यहां छेड़खानी की शिकार महिला को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए चार पुलिस थानों के चक्कर लगाने पड़े।


करीब दर्जनभर पुलिस कर्मियों ने उससे घटना का पूरा ब्योरा सुना और फिर एक थाने से दूसरे थाने भेजकर पल्ला झाड़ लिया। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने लड़की के टीशर्ट और शॉर्ट्स पहनने को लेकर भी टिप्पणी की। ये भी कहा कि वह देर रात को घटना स्थल पर क्या कर रही थी। दरअसल तीन बदमाशों ने रविवार अल सुबह एक लड़की से छेड़छाड़ की। जब लड़की और उसका प्रेमी इसकी शिकायत करने पुलिस के पास पहुंचे, तो उन्हें और बदसलूकी का सामना करना पड़ा। आखिर में बांद्रा पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया।


रहेजा हॉस्पिटल के पास धाराबी ब्रिज पर हुई घटना के तत्काल बाद पीड़ित सायन पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। यहां से उन्हें टरका कर धारावी और वहां से शाहू नगर पुलिस थाने भेज दिया गया। आखिरी में वो बांद्रा पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां घटना के नौ घंटे बाद दोपहर 12.30 बजे केस दर्ज किया गया। इसके बाद मेडिकल टेस्ट और दूसरी प्रक्रियाओं के चलते दोनों को शाम 5.30 तक थाने में ही रहना पड़ा। पुलिस ने इस मामले से जुड़े तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी पहचान प्रदीप गवांडे, अब्दुल शेख और फरहाद सैयद के रूप में हुई है।


पीड़ित लड़के ने बताया कि वारदात के दिन मैं अपनी दोस्त के साथ बाइक से बांद्रा गया था, लेकिन आते वक़्त हम रास्ता भटक गए। तभी रास्ते में हमें तीन लड़के मिले जिस से हमने रास्ता पूछा तो उन्होंने कहा की ये बहुत खतरनाक रास्ता है, हम आपको सही रास्ता बताते हैं आप हमें फॉलो करें। हम उनके पीछे चलने लगे। वो सभी हमसे इंग्लिश में बात कर रहे थे और डिसेंट दिख रहे थे इसलिए हमने उन पर विश्वास किया।


पीड़ितों के मुताबिक शायद धारावी टी-जंक्शन के पास हमारी गाड़ी रुकावई। वहां पर कई सारे ट्रक खड़े थे। हमें कुछ देर इंतजार करने के लिए कह कर तीनों लड़के आगे गए। कुछ देर बाद हमें भी वहा बुलाया। उन्होंने हमें धमकी देकर कहा की ट्रक पर चढ़ जाओ वरना मारकर नाले में फैंक देंगे। मेरी दोस्त ने चिल्लाने की कोशिश की तो उसका मुह दबा दिया। मुझ से हाथापाई की। हम डर कर ट्रक में चढ़ गए। उन तीनों लड़कों ने पहले तो मेरे तीनों फोन ले लिए फिर मेरी दोस्त के पास पड़े पैसे चेक करने लग गए।


लड़के के मुताबिक वो लोग मेरी दोस्त को टच करने की कोशिश कर रहे थे। दो से करीब चार बजे तक हमें उस ट्रक में बैठा के रखा। हमने चिल्लाने की भी कोशिश की मगर वहां से कोई गाड़ी या पुलिस की वैन नहीं गुजरी। सुबह चार बजे जब थोड़ा उजाला होने लगा तो वो भागने की कोशिश करने लगे। तब मैंने उनका पीछा किया और एक लड़के को बाइक से निचे गिरा दिया और उसको पकड़ने की कोशिश की। बाकी दोनों साथी वापिस मुड़कर पीछे आए और मुझे मारा, और अपने साथी के साथ फरार हो गए। जाते समय उन्होंने मेरी बाइक की चाबी नाले में फैंक दी।


लड़के ने बताया कि हम लोग सड़क पर मदद की गुहार लगाते रहे। चार गाड़ियां गुजरी मगर किसी ने हमारी मदद नहीं की। तीस मिनट तक हम मदद की गुहार लगाते रहे। उसके बाद एक टैक्सी आई जिसको हमने आप बीती सुनाई और वो हमें सायन पुलिस स्टेशन ले गए। वहां से हमें धारावी पुलिस स्टेशन और शाहू नगर पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाने लगे। पुलिस कर्मी हमारी मदद करने के बजाय हमसे पूछ रहे थे की तुम रात को वहा क्यों गए थे? क्या ड्रग्स लेने गए थे? मेरी दोस्त ने शॉर्ट्स पहने थे। उसके कपड़ों पर टिपण्णी कर रहे थे। हमसे सवाल जवाब किए जा रहे थे। हमें लगा जैसे हम ही आरोपी हैं। हमको बहुत बुरा लगा। हम वहां से आखिरकार बांद्रा स्टेशन आए और वहां हमारी शिकायत लिखी गई।


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