Wednesday, 20 August 2014

पाक से वार्ता रद्द करने पर भारत ने ...




नई दिल्ली। अलगाववादियों से बातचीत के चलते भारत-पाक सचिव स्तरीय वार्ता स्थगित करने के मुद्दे पर भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय ने पाक उच्चायुक्त के इस तर्क का भी जवाब दिया है कि वो हुर्रियत के लोगों से इसलिए मिले क्योंकि वो कश्मीर की जनता के प्रतिनिधि हैं और कश्मीर मुद्दे पर एक पक्ष हैं।


भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि 1972 और शिमला समझौते में भारत और पाक के तत्कालीन प्रधानमंत्रियों के बीच तय हो गया था कि जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर दो ही पक्ष हैं, एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। हमारे द्वपक्षीय समझौते में मूल में यही सिद्धांत है और 1999 में लाहौर घोषणा में भी इसकी पुनः पुष्टि हुई।


इस सवाल पर कि भारत ने फिर क्यों अतीत में पाकिस्तान और हुर्रियत की मुलाकात होने दी, प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व ने हमें आश्वस्त किया था कि वो जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर शांतिपूर्ण वार्ता के प्रति प्रतिबद्ध है और वो आतंकियों को हमारे खिलाफ आतंकवाद फैलाने की इजाजत नहीं देगा लेकिन मुंबई हमला हमारे सामने है। उसके बाद इस हमले की जांच को लेकर पाक का रवैया भी सामने है। साफ है कि ऐसे में उसके अश्वासन का कोई मतलब नहीं रह जाता।


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