नई दिल्ली। असम के गोलाघाट में एक बार फिर हिंसा भड़क गई है। आज फिर तनाव को काबू करने के लिए पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई और 6 घायल हो गए। इस इलाके में कल हुई पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे थे।लोगों ने आज सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
असम के गोलाघाट में कल हुई पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों ने आज सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की और प्रदर्शन किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने सफाई दी है कि हालात नियंत्रण से बाहर होने के बाद ही पुलिस कार्रावाई की गई। उनका ये भी आरोप है कि केंद्र सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है।
निहत्थे नागरिकों को निशाना बना कर सीधी फायरिंग। पुलिस औऱ सुरक्षा बल के बीच घिरे लोगों की बर्बर पिटाई। मजबूर महिलाओं से डंडे को बल पर भिड़ती महिला पुलिस। असम के गोलाघाट जिले में 12 अगस्त से सुलग रहे तनाव ने मंगलवार को विस्फोटक रूप ले लिया। असम की पुलिस ने लोगों पर फायरिंग की।
इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस लाठीचार्ज और फायरिंग के बावजूद प्रदर्शनकारी डरे नहीं। लाठीचार्ज और फायरिंग में कई लोगों के जख्मी होने की खबर है जबकि पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस कार्रवाई की चौतरफा निंदा के बाद मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने सफाई दी कि कुछ लोग मामले को शांत नहीं होने देना चाहते।
दरअसल इस तनाव की शुरुआत 12 अगस्त को हुई जब नागालैंड सीमा पर बसे गोलाघाट में कुछ नगा उपद्रवियों ने हमला बोलकर असम के नौ लोगों को मौत के घाट उतार दिया और करीब सौ घरों में आग लगा दी। इस घटना के बाद असम के गोलाघाट जिले के सात गांवों के करीब 10 हजार लोग अपना घर छोड़कर भाग गए। हालांकि बाद में जवाबी कार्रवाई के तहत असम की ओर से आर्थिक नाकेबंदी शुरु कर दी गई। सड़क जाम कर माल ले जा रहे ट्रकों को नगालैंड जाने से रोक दिया गया। पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान यही जाम खुलवाने पहुंचे थे। हालांकि इस मामले में केंद्र सरकार इस मामले में सीआरपीएफ को क्लीन चिट दे रही है।
गृह राज्यमंत्री किरण रिजुजु ने कहा कि असम में जो भी हुआ है वो असम और नगालैंड बॉर्डर पर हुआ है। दोनों सरकारों को आपस में बैठकर बात करनी चाहिए। नागालैंड की पुलिसकर्मियों को पकड़ कर रखा गया था। केंद्र ने यहां से बल भेजा तब जाकर उन्हें छुड़ाया गया। केंद्र सरकार असिस्ट कर सकता है, लेकिन जो फायरिंग हुई उसके लिए सीआरपीएफ को जिम्मेदार ठहराना गलत है।
इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय ने गृहमंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है। उसके बाद से ही अचानक ये मामला केंद्र सरकार बनाम राज्य सरकार हो गया है। मुख्यमंत्री तरूण गोगोई का कहना है कि ये गोलाघाट में ये तनाव हफ्ते से बना हुआ है। लेकिन केंद्र की ओर से कोई इसकी सुध लेने नहीं आया। चूंकि तनाव दोनो राज्यों की सीमा पर है इसलिए उनका मानना है कि जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
बहरहाल इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच असम का गोलाघाट अब भी सुलग रहा है। पुलिस और सुरक्षा बलों के खिलाफ लोगों का प्रदर्शन जारी है। बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने कुछ वाहनों में आग लगा दी। इस मुद्दे पर 21 अगस्त को असम के सीएम तरुण गोगोई और नागालैंड के सीएम टीआर जेलियांग की बीच बैठक होने वाली है, लेकिन तब तक गोलाघाट में हालात क्या मोड़ लेंगे, कहना मुश्किल है।
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