Saturday, 13 September 2014

कलियुग की अग्निपरीक्षा: बच्चों के ...




नई दिल्ली। हम आपको कलियुग की अग्निपरीक्षा से रूबरू कराने जा रहे हैं। उस अग्निपरीक्षा से, जो कुछ समाज, कुछ गांव और कुछ जातियों में अभी भी बना हुआ है सच जानने का पैमाना। सच्चाई साबित करने के लिए इस पैमाने की कसौटी पर खरा उतरना जरूरी है। इसलिए सागर में चार बच्चों को अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ा। इसी तरह मध्य प्रदेश के ही दमोह में एक युवक को अग्निपरीक्षा देनी पड़ी।


दमोह में अग्निपरीक्षा


खेत में जमा भीड़ एक खास दिशा में बहुत गौर से देखती है। लगता है जैसे भीड़ कुश्ती का मुकाबला या फिर किसी तरह का खेल देखने जमा हुई हो। लेकिन ऐसा कुछ नहीं। यहां जो हुआ उसे एक खास नाम दिया गया था। ये नाम है, अग्निपरीक्षा। यहां मौजूद तमाम लोग अग्निपरीक्षा देखने पहुंचे। आखिर कलियुग में ये कौन सी अग्निपरीक्षा हो रही है?


इस भीड़ से हटकर बीच खेत एक शख्स मौजूद था। इस शख्स के हाथ में नीम के पेड़ की डंठल थी। मंत्रोच्चार की तरह ये शख्स कुछ बोल भी रहा है। बीच खेत से धुआं निकल रहा था। यहां आग जलाई गई और इस आग पर एक कड़ाही रखकर सरकंडे के एक लीटर तेल को उबाला गया। जब कड़ाही का तेल पूरी तरह खौलने लगा तो खेत में मौजूद शख्स के कहने पर भीड़ से दो बुजुर्ग इस कड़ाही के पास आए और फिर कड़ाही में तेल के खौलने की तस्दीक की। ये दोनों कोई मामूली शख्स नहीं। ये दोनों गांव के सरपंज थे। ये मंजर है मध्य प्रदेश के दमोह के किल्लाई गांव का और यहां जमा भीड़ का रिश्ता है पारधी समाज से।


कड़ाही में खौलते तेल का असर जानने के लिए नीम के डंठल में लगी हरी पत्ती को तेल में डाला गया और छन से आई आवाज से इसके गर्म होने की तस्दीक हो गई। फिर उस शख्स को यहां आने को कहा गया, जिसे अग्निपरीक्षा से गुजरना था।


ये शख्स बड़े-बुजुर्गों और पंचों के आदेश के बाद सीधा कड़ाही के पास आता है और खौलते तेल में डाले गए एक कंकड़ को निकाल कर पंच को थमा देता है। यानी ये शख्स खौलते तेल में अपना हाथ डालता है। इसके बाद ये शख्स वहां मौजूद पंचों और बुजुर्गों को अपना हाथ दिखाता है। ये शख्स किस्मत वाला था कि इस शख्स की हथेली जली नहीं या उसमें जख्म नहीं हुआ। अगर जख्म होता तो इस शख्स को अग्निपरीक्षा में फेल करार दिया जाता।


अग्निपरीक्षा के लिए खास तैयारी की जाती है। इसके लिए सरकंडे की लकड़ी की आग जलाई जाती है। एक लीटर तेल को कड़ाही में गर्म किया जाता है। खौलने के बाद इसमें संदिग्ध को हाथ डालने को कहा जाता है। इस शख्स पर एक व्यक्ति ने मारपीट का आरोप लगा था। पंचायत ने इन्हें ईमान साबित करने के लिए अग्निपरीक्षा से गुजरने को कहा। ऐसे ही दो और संदिग्धों को भी अग्निपरीक्षा से गुजारा गया और दोनों के हाथ बुरी तरह जल गए। दोनों को इलाज के लिए जबलपुर के अस्पताल का रुख करना पड़ा।


ये है कलियुग की अग्निपरीक्षा। खौलते तेल में हाथ डालने की कल्पना भी आपकी रूह कंपा देगी, लेकिन यहां इमान साबित करने के लिए इस दौर से गुजरना पड़ता है। क्या आप इस अग्निपरीक्षा से सहमत हैं? पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 324, 342 और 506 के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।


सागर में भी अग्निपरीक्षा


मध्य प्रदेश के ही सागर से अग्निपरीक्षा का एक और मामला सामने आया है। इस मामले में चार बच्चे कलियुगी अग्निपरीक्षा का शिकार हुए। इन बच्चों को खौलते हुए तेल में हाथ डालने को मजबूर किया गया।


चार बच्चे, बेहद मासूम। सभी की उम्र 11 साल से 14 साल तक। इनका कसूर ये है कि ये बेहद गरीब हैं। इनका कसूर ये है कि अभाव में जीने की व्रुाह से इन पर चोर होने का शक किया गया। इनकी इसी कमी का नतीजा है कि जिस वक्त इन्हें अपने हाथों के जख्म का इलाज कराने के लिए अस्पताल में भर्ती होना चाहिए, ये थाने में बयान दर्ज करवा रहे थे।


ये बच्चे मध्य प्रदेश के सागर के हैं। सागर जिले के झिला गांव के। करीब 5000 की आबादी वाले इस गांव के इन चार मासूमों को अग्निपरीक्षा से गुजरने के लिए मजबूर किया गया। अग्निपरीक्षा से गुजरने के बाद इन चारों के हाथों में फोड़े हो गए। जख्म से लाल हो गए। मामले के तूल पकड़ने के बाद हाथों पर मरहम लगा। लेकिन मरहम से भी जब जलन कम नहीं हुई तो बच्चे रह-हर कर इन पर फूंक मारते। शायद उसी से कुछ आराम मिल जाए।


लेकिन असल सवाल ये है कि इन चारों को अग्निपरीक्षा से क्यों गुजरना पड़ा? असल में, भगवान दास नाम के एक शख्स के घर से किसी ने 500 रुपये चुरा लिए।चोरी का शक इन्हीं चार मासूमों पर गया। पीड़ित बच्चों का आरोप है कि भगवानदास की पत्नी शशि ने तेल गर्म किया। उबलते तेल में बारी-बारी से बच्चों को हाथ डालने को कहा गया। इसके बाद चारों को घर के अंदर ही बंधक बनाकर रखा गया। कुछ देर बाद एक बच्चा वहां से भागने में कामयाब रहा। बुरी तरह जलन की वजह से उसने नाले के पास पानी में हाथ डुबो दिया। इसके बाद उसके हाथ में फफोले पड़ गए।


पीड़ित मासूम ने कहा कि हमसे कहा गया के गर्म तेल में हाथ डालो, हमने नहीं डाले तो कहा कि इसका मतलब तुमने ही चुराए हैं तो हमने डाल दिए। दूसरे पीड़ित मासूम ने कहा कि हमको ये कहकर बुलाया कि कुछ काम है। हम गए तो कहा कि तुमने पैसा चुराया है। तेल में हाथ डालो। हमने मना किया तो ज़बरदस्ती हाथ डूबो दिए।


साफ है, महज 500 रुपये की चोरी के शक के बिना पर ही बच्चों पर अत्याचार की सारी हदें पार कर दी गईं। एक मासूम ने जब गांव वालों को आपबीती सुनाई उसके बाद ही बाकी बंधक बच्चों को पुलिस की मदद से छुड़ाया जा सका। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।


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