Monday, 1 September 2014

पीएम की 'पाठशाला' पर क्यों बरपा है ...




नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षक दिवस पर देश भर के स्कूली छात्रों को संबोधित करने वाले हैं। इंटरनेट, टीवी और रेडियो के जरिए इस स्कूली छात्रों से होने वाले इस संवाद को कामयाब बनाने में सारा सरकारी अमला जुटा है। स्कूली बच्चे भी प्रधानमंत्री से संवाद को लेकर खासे उत्साहित हैं।


लेकिन इस आयोजन की टाइमिंग को लेकर विवाद शुरु हो गया है। स्कूल चाहते हैं कि ये कार्यक्रम स्कूल टाइमिंग के भीतर ही हो। विवाद के बाद मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का कहना है कि बच्चों के लिए इस आयोजन में शरीक होना अनिवार्य नहीं है।


बच्चों और स्कूली छात्रों के बीच आसानी से घुलमिल जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब उनसे बेहतर संवाद कायम करना चाहते हैं। शिक्षक दिवस पर देश भर के स्कूली छात्रों से संवाद इसी कोशिश का नतीजा है। स्कूलों को जारी दिशा निर्देश के मुताबिक शाम 3 बजे से 4:45 तक प्रधानमंत्री बच्चों को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री के इस भाषण का प्रसारण टीवी और इंटरनेट के जरिए होगा। स्कूलों से कहा गया है कि बच्चों को भाषण सुनाने का इंतजाम करें।


दिल्ली में शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि इस मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन इस कार्यक्रम के समय को लेकर विरोध हो रहा है। सुबह से आए बच्चों को शाम 5 बजे तक रुकना होगा। कांग्रेस का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री स्कूली बच्चों को भाषण सुनाना चाहते हैं, तो स्कूली समय के दौरान सुनाना चाहिए।


मनीष तिवारी ने कहा कि टीचर्स डे और गुरू पर्व में कोई फर्क नहीं है। लेकिन अगर प्रधान मंत्री प्रवचन देना चाहते थे तो बेहतर होता के प्रवचन का समय वो रखते कि बच्चों के स्कूल का समय होता कम से कम इससे बच्चों को स्कूल के स्टाफ और मां बाप को दिक्कत न होती।


वहीं, मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी का कहना है कि इस मुद्दे पर बिना वजह विवाद किया जा रहा है। अब तक स्कूली बच्चे महज समाचार पत्र, या मीडिया के जरिए ही प्रधानमंत्री को देख या सुन पाते थे। देश के इतिहास में पहली बार सीधा उनसे प्रधानमंत्री की बातचीत का आयोजन किया जा रहा है। ईरानी का ये भी कहना है कि किसी स्कूल के साथ जबरदस्ती नहीं जी रही है और इसमें हिस्सा लेना पूरी तरह से स्वैच्छिक है।


स्मृति ईरानी ने कहा कि स्कूलों के लिए ये बूरी तरीके से स्वैच्छिक है और इस पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। अब तक बच्चे पीएम को टीवी और अखबारों में सुनते आए थे। ये पहला मौका है कि सीधा बच्चे उनसे जुड़ पाएंगे।


इसबार सरकार ने शिक्षक दिवस को गुरु दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसे लेकर भी विवाद चल रहा है। कुछ राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि सरकार शिक्षक दिवस के मौके पर भी अपने एजेंडे को पूरी करने की कोशिश कर रही है।


लोगों से सीधा संवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खासियत है और वो इसका खासा राजनीतिक फायदा भी उठाते हैं। शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री स्कूली बच्चों से सीधे संवाद से जुड़ेगे। विरोधी उनके इस कदम की आलोचना कर सकते हैं। लेकिन ये भी याद रखा जाना चाहिए कि लोकतंत्र की बुनियाद ही संवाद है।


इसी मामले पर चर्चा में हिस्सा लिया बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा, कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी, संघ मामलों के जानकार राकेश सिन्हा, दिल्ली के कालका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल ओनिका मेहरोत्रा। क्या थी मेहमानों की राय, जानने के लिए देखें वीडियो।


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