नई दिल्ली। पंजाबी फिल्म 'क़ौम दे हीरे' रिलीज होने से पहले विवादों में घिर गई है। कांग्रेस का कहना है कि ये फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से जुड़ी है और फिल्म में इंदिरा गांधी के हत्यारों की तारीफ की गई है। ऐसे में इस फिल्म को रिलीज करना ठीक नहीं। कांग्रेस का आरोप है कि फिल्म में इंदिरा के हत्यारों को हीरो की तरह पेश किया गया है।
गौरतलब है कि ये फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या करने वाले उनके बॉडीगार्ड बेअंत सिंह और सतवंत सिंह पर बनाई गई है। बीजेपी ने भी फिल्म पर रोक लगानी की मांग की है। ये फिल्म भारत में 22 अगस्त को रिलीज होनी है जबकि विदेशों में यह पहले ही रिलीज़ हो चुकी है।
फिल्म पर राजनीति जारी है। अकाली दल के मनजीत सिंह जीके ने कहा कि मैंने ये फिल्म नहीं देखी है। लेकिन मैं कांग्रेस के मित्रों से पूछना चाहता हूं कि जिन लोगों ने इंदिरा गांधी को मारा उनको फांसी पर लटका दिया। लेकिन इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कितने निर्दोष लोगों को मारा उसका इंसाफ कब होगा। कांग्रेस वाले माफी मांगे, कानून को काम करने देंगे तो ऐसी फिल्म कोई नहीं बनाएगा।
वहीं कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि जो फिल्म है और उसकी रिपोर्ट इंटेलिजेंस की है। उसमें ये लगता है कि जिन लोगों ने इंदिरा गांधी को मारा है उसे ग्लोरिफाई किया गया है। उससे देश के अंदर एक एहसास पैदा होगा जिससे लोगों के बीच विश्वास होगा कि आप गलती करें और लोग उसकी तारीफ करेंगे।
सीपीआई नेता माजिद मेनन ने फिल्म के बारे में कहा कि उस घटना को दोबारा उजागर करना देश के लिए ठीक नहीं है। पंजाबी भाइयों को अमन बनाना चाहिए। अमन बनाना उनका भी काम है। भड़काऊ फिल्म नहीं बनानी चाहिए। अगर उसकी रिलीज पर कुछ हो सकता है और अगर आईबी रिपोर्ट है तो फिल्म को रोकना चाहिए।
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