Tuesday, 26 August 2014

निसंतान हिंदू पतियों के लिए दूसरी ...




नई दिल्ली। साईं बाबा के खिलाफ बुलाई गई धर्म संसद में एक और प्रस्ताव पास हुआ। शंकराचार्य के सुझाव पर संतों ने मांग उठाई कि हिंदू विवाह कानून में बदलाव किया जाए। नि:संतान होने पर हिंदू पति को दूसरी महिला से विवाह का अधिकार मिले। शंकराचार्य समर्थकों ने इस प्रस्ताव में सीधे केंद्र सरकार से ये मांग उठाई और इस बाबत प्रस्ताव भी सर्वसहमति से पास कर दिया।


धर्मसंसद जैसी जगह से इस तरह के प्रस्ताव पर धर्मसंसद से इतर अन्य धर्मगुरुओं ने सवाल उठाए हैं। कुछ संतों ने इसे देश की महिलाओं का अपमान बताया है तो कइयों का कहना है कि एक तरफ तो शंकराचार्य साईं बाबा को इसलिए संत मानने से इनकार कर रहे हैं क्योंकि वो मुसलमान थे तो दूसरी तरफ इस्लाम में मिली एक से ज्यादा शादियों की छूट को ही हिंदू धर्म में अपनाने की बात कह रहे हैं।


सवाल उठ रहे हैं कि क्या शंकराचार्य का ये प्रस्ताव व्यावहारिक है? क्या शंकराचार्य का ये प्रस्ताव हिंदू परिवारों को मंजूर होगा? क्या महिलाएं शंकराचार्य के इस प्रस्ताव से सहमत होंगी? क्या पहली पत्नी के रहते और उसे तलाक दिए बिना दूसरा विवाह जायज होगा? संतान के लिए गोद लेने की परंपरा को बढ़ावा देना क्या हिंदू परंपरा के विरूद्ध है?


इन्हीं सब सवालों पर आईबीएन7 की चर्चा में शामिल हुए धर्म और शास्त्रों के विद्वान स्वामी कैलाशानंद, आचार्य प्रमोद कृष्णन, धर्मगुरु महंत नवल किशोर दास, संत महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि, शंकराचार्य के समर्थक एच एस रावत, साईं बाबा ट्रस्ट के प्रमुख हरीश अब्रोल और जैन मुनि क्रांति दूत संतश्री अरिहंत ऋषि। (वीडियो देखें)


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