Monday, 18 August 2014

प्लास्टिक के कचरे से अब ...




नई दिल्ली। प्लास्टिक के कचरे की समस्या से निपटने और पेट्रोल-डीजल की किल्लत को दूर करने की दिशा में भारतीय शोधकर्ताओं को एक बड़ी कामयाबी मिली है। इसके तहत भारत जल्द ही प्लास्टिक को उच्च गुणवत्ता वाले पेट्रोल-डीजल में बदलने में कामयाब हो जाएगा। ये उपलब्धि देहरादून स्थित भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के शोधकर्ताओं ने हासिल की है।


संस्थान ने देश में पहली बार ऐसी तकनीक विकसित की है जो प्लास्टिक के कचरे को पेट्रोलियम उत्पादों में तब्दील कर देती है। ये ग्रीन तकनीक अब तक जर्मनी, जापान और अमेरिका के पास ही थी जबकि ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में इसपर काम ही चल रहा है।


डेली मेल की खबर के मुताबिक इस तकनीक की मदद से प्लास्टिक को उपयुक्त उत्प्रेरकों के संयोजन का इस्तेमाल कर गैसोलीन, डीजल या सुगंधित गैसों में बदला जाता है। इस प्रक्रिया में आम सहउत्पाद के रूप में एलपीजी भी पैदा होती है। इस प्रक्रिया में पैदा होने वाले डीजल में सल्फर नगण्य होती है जिसकी वजह से इसे बहुत उच्च गुणवत्ता का कहा जाता है। इसके इस्तेमाल से इंजन से निकलने वाला धुआं कम खतरनाक होगा। इसके अलावा ये आम डीजल की तुलना में माइलेज में भी दो किलोमीटर प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर देगा।


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